संभल के गुन्नौर तहसील में करोड़ों की सरकारी कृषि भूमि आवंटन में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा
संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जिले की गुन्नौर तहसील में करीब 24 साल पुराने सरकारी कृषि भूमि आवंटन घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि 1987 से 2011 के बीच 5 गांवों की सरकारी श्रेणी-6 भूमि का कथित रूप से फर्जी तरीके से आवंटन कर उसे एक ही परिवार के सदस्यों और कथित बेनामी व्यक्तियों के नाम दर्ज करा दिया गया।
मामले की जांच एडीएम (न्यायिक) सौरव कुमार पांडेय द्वारा पूरी किए जाने और रिपोर्ट डीएम अंकित खंडेलवाल को सौंपे जाने के बाद 17 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
सरकारी जमीन पर परिवार के नाम कराए गए पट्टे
एफआईआर के अनुसार, आरोप है कि सरकारी कृषि भूमि के पट्टे नियमों के विपरीत एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम जारी कराए गए। इसमें पत्नी, बेटे, बेटियां, पुत्रवधुएं, भाई और भतीजों के अलावा कुछ कथित बेनामी व्यक्तियों के नाम भी शामिल किए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि कई ऐसे नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज किए गए, जिनके बारे में गांव के लोगों को भी कोई जानकारी नहीं थी।
5 गांवों की सरकारी भूमि बनी फर्जीवाड़े का केंद्र
जांच के दायरे में आने वाले गांव हैं—
- होतमगढ़ी
- बिचपुरी सैलाव
- गुन्नौर हीरापुर
- रसूलपुर
- हुसैनपुर सैलाव
इन गांवों की श्रेणी-6 सरकारी कृषि भूमि को कथित रूप से नियमों की अनदेखी कर निजी नामों पर दर्ज कराया गया।
राजस्व अभिलेखों और खतौनी में हेरफेर के आरोप
जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि राजस्व रिकॉर्ड, खतौनी, चकबंदी अभिलेख, सीएच-45, खाता संख्या 85, 97 और 101 सहित कई दस्तावेजों में हेरफेर कर सरकारी भूमि पर कब्जा दिलाने की कोशिश की गई।
वर्ष 2008 और 2009 में चकबंदी के दौरान भी रिकॉर्ड में बदलाव कर नाम दर्ज कराने के आरोप सामने आए हैं।
24 साल तक चलती रहीं शिकायतें
इस कथित घोटाले की शिकायतें वर्षों से विभिन्न स्तरों पर की जाती रहीं। शिकायतकर्ताओं कुंवरपाल, सुगढ़पाल और पूर्व मंत्री अजीत कुमार उर्फ राजू ने कई बार प्रशासन और मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायतें भेजीं।
लंबी जांच के बाद एडीएम की रिपोर्ट के आधार पर अब पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू की है।
जांच से बचने के लिए अदालतों का लिया गया सहारा
एफआईआर में उल्लेख है कि कार्रवाई शुरू होने के बाद संबंधित पक्षों ने भूमि बचाने के लिए सिविल न्यायालय, एडीएम न्यायालय, अपर आयुक्त मुरादाबाद, राजस्व परिषद लखनऊ और इलाहाबाद हाईकोर्ट तक विभिन्न याचिकाएं दायर कीं।
अब पुलिस इन सभी न्यायालयी दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की भी जांच करेगी।
17 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR
पुलिस ने 17 नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इन पर सरकारी भूमि के फर्जी आवंटन, राजस्व अभिलेखों में हेरफेर और नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
अब किन बिंदुओं पर होगी जांच?
पुलिस और राजस्व विभाग अब निम्न बिंदुओं की जांच करेंगे—
- सरकारी कृषि भूमि के आवंटन की वैधता
- पट्टा पत्रावलियों की जांच
- राजस्व अभिलेखों और खतौनी का मिलान
- चकबंदी आदेशों की सत्यता
- बेनामी नामों की पहचान
- अधिकारियों की भूमिका और संभावित मिलीभगत
मुख्य Highlights
- 24 साल पुराने सरकारी जमीन घोटाले का खुलासा।
- 5 गांवों की सरकारी श्रेणी-6 भूमि के फर्जी आवंटन का मामला।
- एक ही परिवार और कथित बेनामी व्यक्तियों के नाम कराए गए पट्टे।
- राजस्व रिकॉर्ड, खतौनी और चकबंदी अभिलेखों में हेरफेर के आरोप।
- 17 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज, पुलिस जांच शुरूमुख्यमंत्री स्तर तक पहुंची थीं शिकायतें।
- कई वर्षों तक अदालतों में मुकदमे चलाकर कार्रवाई रोकने का प्रयास करने का आरोप।
