चेन्नई। तमिलनाडु में सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में ‘तमिल थाई वाज़थु’ गाए जाने को लेकर चल रहे विवाद पर मद्रास हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के हालिया निर्देशों में राज्य के गीत को बाद में गाने की कोई बाध्यता नहीं बताई गई है।
मामले की सुनवाई चेन्नई निवासी अनन्या राधाकृष्णन की जनहित याचिका पर हुई। याचिका में मांग की गई थी कि तमिलनाडु के सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत ‘तमिल थाई वाज़थु’ से सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।
Table of Contents
Toggle‘तमिल थाई वाज़थु’ पर नहीं है कोई रोक
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि तमिलनाडु में सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत ‘तमिल थाई वाज़थु’ से और समापन राष्ट्रगान से करने की परंपरा रही है। इसी को लेकर उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय के 28 जनवरी के सर्कुलर को चुनौती दी थी।
केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने सुनवाई के दौरान 9 जुलाई को जारी नए नोटिफिकेशन का उल्लेख किया। केंद्र ने स्पष्ट किया कि इसमें ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान के संबंध में निर्देश दिए गए हैं, लेकिन राज्य के गीतों के क्रम को लेकर कोई निर्देश नहीं दिया गया है।
‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान को लेकर केंद्र का निर्देश
केंद्र की ओर से अदालत को बताया गया कि नए निर्देश के अनुसार ‘वंदे मातरम’ के बाद राष्ट्रगान गाया जाना है। हालांकि, इसमें यह नहीं कहा गया कि ‘तमिल थाई वाज़थु’ को सबसे अंत में रखा जाए।
यानी, केंद्रीय निर्देशों के आधार पर राज्य के पारंपरिक गीत को सरकारी कार्यक्रम में पहले गाए जाने पर कोई स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है।
मद्रास हाई कोर्ट ने अपने कार्यक्रम का दिया उदाहरण
चीफ जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने सुनवाई के दौरान मद्रास हाई कोर्ट में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह का उदाहरण भी दिया। कोर्ट ने बताया कि वहां पहले ‘तमिल थाई वाज़थु’, फिर ‘वंदे मातरम’ और उसके बाद राष्ट्रगान का क्रम अपनाया गया था।
कोर्ट का यह उदाहरण इस बात को स्पष्ट करता है कि केंद्रीय दिशा-निर्देशों को राज्य के गीत को अनिवार्य रूप से बाद में रखने के आदेश के रूप में नहीं पढ़ा जा सकता।
तमिलनाडु में क्यों गरमाया गीतों का विवाद?
‘तमिल थाई वाज़थु’, ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान के क्रम को लेकर तमिलनाडु में पिछले कुछ समय से राजनीतिक और प्रशासनिक बहस चल रही है। राज्य सरकार और राजभवन के बीच भी इस मुद्दे पर मतभेद सामने आए हैं।
विवाद उस समय और बढ़ गया था जब पूर्व राज्यपाल आरएन रवि ने तमिलनाडु विधानसभा में अपने पारंपरिक संबोधन से पहले राष्ट्रगान बजाने पर जोर दिया था। इसके बाद सरकारी कार्यक्रमों में गीतों के क्रम को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई।
मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में भी उठा था मुद्दा
यह विवाद मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान भी सामने आया था। समारोह में ‘वंदे मातरम’, राष्ट्रगान और ‘तमिल थाई वाज़थु’ के क्रम को लेकर चर्चा हुई थी। राज्य सरकार ने बाद में कहा था कि भविष्य में सरकारी कार्यक्रमों में तमिल गीत को प्राथमिकता दी जाएगी।
विधानसभा भी पारित कर चुकी है प्रस्ताव
तमिलनाडु विधानसभा ने हाल ही में एक प्रस्ताव पारित कर सरकारी, शैक्षणिक और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े कार्यक्रमों में ‘तमिल थाई वाज़थु’ को पहला गीत बनाए जाने की मांग की है।
हालांकि, इस पूरे मामले में अंतिम न्यायिक स्थिति अदालत के अंतिम आदेश से और स्पष्ट होगी। फिलहाल हाई कोर्ट ने पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
मुख्य बातें
- ‘तमिल थाई वाज़थु’ पर कोई रोक नहीं होने की बात हाई कोर्ट ने स्पष्ट की।
- केंद्रीय निर्देशों में राज्य गीत को सबसे अंत में रखने की बात नहीं है।
- ‘वंदे मातरम’ के बाद राष्ट्रगान गाने का निर्देश केंद्र ने दिया है।
- मद्रास हाई कोर्ट में भी तमिल गीत → वंदे मातरम → राष्ट्रगान का क्रम अपनाया गया।
- हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा है।
