परमवीर चक्र विजेता कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया जी की जयंती पर पूरा राष्ट्र उन्हें कोटि-कोटि नमन करता है। भारत माँ के इस वीर सपूत ने अपने अदम्य साहस, त्याग और नेतृत्व क्षमता से इतिहास में वह स्थान बनाया है, जिसे समय कभी मिटा नहीं सकता।
कैप्टन सलारिया का जीवन कर्तव्य, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की जीवंत मिसाल है। कांगो मिशन के दौरान उन्होंने दुश्मनों का सामना असाधारण वीरता से किया। संख्या में कम होने के बावजूद उन्होंने अपनी गोरखा राइफल्स के साथ मिलकर दुश्मनों को निर्णायक रूप से पराजित किया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अंतिम सांस तक लड़ते हुए उन्होंने अद्वितीय बलिदान का परिचय दिया।
उनके इसी अतुलनीय शौर्य के कारण उन्हें भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान – परमवीर चक्र (मरणोपरांत) प्रदान किया गया।
आज उनकी जयंती पर हम न केवल उनके बलिदान को स्मरण करते हैं बल्कि यह संकल्प भी दोहराते हैं कि राष्ट्र की सुरक्षा और अस्मिता के लिए उनके दिखाए मार्ग पर चलते रहेंगे।
कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया का जीवन हर भारतीय के लिए प्रेरणा, संकल्प और वीरता का प्रतीक है।
