लद्दाख में भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि, 14,000 फीट की ऊंचाई पर बने पहले जियोथर्मल कुएं
जम्मू: भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। लद्दाख के पुगा (Puga Valley) में देश के पहले और सबसे गहरे जियोथर्मल (भूतापीय) कुओं का लोकार्पण किया गया। समुद्र तल से 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर बनाए गए ये कुएं भारत की ऊर्जा सुरक्षा और ग्रीन एनर्जी मिशन को नई दिशा देंगे।
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ओएनजीसी (ONGC) यहां 1 मेगावाट की जियोथर्मल पायलट परियोजना पर काम कर रही है। यह परियोजना भविष्य में लद्दाख को स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
मुख्य बातें (Highlights)
- लद्दाख के पुगा में भारत के पहले जियोथर्मल कुओं का लोकार्पण।
- 14,000 फीट की ऊंचाई पर 1,000-1,000 मीटर गहरे दो कुएं तैयार।
- 400 मीटर की गहराई पर 135°C तापमान दर्ज।
- ONGC विकसित कर रहा है 1 मेगावाट की पायलट परियोजना।
- जियोथर्मल ऊर्जा से साल के 365 दिन, 24 घंटे बिजली उत्पादन संभव।
- कार्बन-न्यूट्रल लद्दाख और नेट-जीरो इंडिया मिशन को मिलेगा बल।
14 हजार फीट की ऊंचाई पर बनी ऐतिहासिक परियोजना
लद्दाख के दुर्गम पुगा क्षेत्र में समुद्र तल से 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर दो जियोथर्मल कुएं तैयार किए गए हैं। दोनों कुओं की गहराई लगभग 1,000 मीटर है।
कठिन मौसम, अत्यधिक ठंड, सीमित कार्य अवधि और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद इंजीनियरों ने रिकॉर्ड समय में इस परियोजना को पूरा किया।
ONGC की ग्रीन एनर्जी परियोजना
देश की अग्रणी ऊर्जा कंपनी ONGC इस परियोजना के माध्यम से लद्दाख में 1 मेगावाट क्षमता वाला जियोथर्मल पावर प्लांट विकसित कर रही है।
यह परियोजना केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में पूरे क्षेत्र को स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
400 मीटर की गहराई पर मिला 135 डिग्री तापमान
परियोजना पर काम कर रहे इंजीनियरों के अनुसार,
- 400 मीटर की गहराई पर 135 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया है।
- आगे की ड्रिलिंग के दौरान इससे भी अधिक तापमान मिलने की संभावना है।
- उच्च तापमान मिलने से बिजली उत्पादन की क्षमता और बढ़ सकती है।
24 घंटे और पूरे साल मिलेगी बिजली
जियोथर्मल ऊर्जा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह दिन-रात बिना रुके बिजली उत्पादन कर सकती है।
जियोथर्मल ऊर्जा के फायदे
- 24 घंटे लगातार बिजली उत्पादन
- मौसम पर निर्भरता नहीं
- पर्यावरण के लिए सुरक्षित
- कार्बन उत्सर्जन में कमी
- दूर-दराज के इलाकों के लिए विश्वसनीय ऊर्जा स्रोत
- लंबे समय तक कम लागत में बिजली उत्पादन
सौर ऊर्जा केवल दिन में काम करती है, जबकि पवन ऊर्जा हवा की गति पर निर्भर रहती है। इसके विपरीत जियोथर्मल ऊर्जा पृथ्वी की प्राकृतिक गर्मी का उपयोग करती है और पूरे वर्ष लगातार बिजली उपलब्ध करा सकती है।
उपराज्यपाल ने क्या कहा?
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगी।
उन्होंने बताया कि कठिन मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद इंजीनियरिंग टीम ने रिकॉर्ड समय में ड्रिलिंग पूरी की। यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्बन-न्यूट्रल लद्दाख और नेट-जीरो इंडिया के विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
भारत के लिए क्यों है यह परियोजना खास?
यह परियोजना कई कारणों से ऐतिहासिक मानी जा रही है:
- भारत का पहला गहरा जियोथर्मल ऊर्जा प्रोजेक्ट।
- लद्दाख को स्वच्छ ऊर्जा का हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम।
- जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी।
- ग्रीन एनर्जी और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
- भविष्य में अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में भी ऐसी परियोजनाओं का रास्ता खुलेगा।
निष्कर्ष
लद्दाख के पुगा में शुरू हुई जियोथर्मल परियोजना भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। 14,000 फीट की ऊंचाई पर तैयार किए गए ये जियोथर्मल कुएं भविष्य में 24 घंटे स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराने के साथ-साथ देश को ग्रीन एनर्जी, कार्बन-न्यूट्रल विकास और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करेंगे।
