कानपुर में सीबीआई अधिकारी बनकर की डिजिटल अरेस्ट ठगी, कारोबारी से 4 लाख रुपये वसूले

 

कानपुर के जनरलगंज में सीबीआई अधिकारी बनकर साइबर ठगों ने एक कारोबारी को डिजिटल अरेस्ट कर 4 लाख रुपये ठगे। जानें पूरी घटना, पुलिस कार्रवाई, और डिजिटल अरेस्ट से बचने के तरीके।

जनरलगंज, कानपुर — साइबर अपराधियों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर एक रेस्टोरेंट संचालक को डिजिटल अरेस्ट कर चार लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित की शिकायत पर लगभग सात महीने बाद बादशाहीनाका पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कैसे हुई ठगी की शुरुआत

जनरलगंज निवासी एक कारोबारी के अनुसार, 16 जुलाई 2025 को उनके व्हाट्सएप पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली सीबीआई का अधिकारी बताया और दावा किया कि दिल्ली बम ब्लास्ट मामले में पकड़े गए आरोपितों के पास उनका आधार कार्ड और बैंक खाते की जानकारी मिली है। ठगों ने यह भी कहा कि उनके बैंक खाते का इस्तेमाल आतंकवादी फंडिंग के लिए किया गया है।

डिजिटल अरेस्ट कर मानसिक दबाव बनाया

इसके बाद पीड़ित को अलग-अलग व्यक्तियों से बात कराई गई और उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया। ठगों ने धमकी दी कि जांच पूरी होने तक वह किसी से संपर्क न करें, वरना उनके परिवार की संपत्ति और सभी बैंक खातों की जांच की जाएगी।

चार लाख रुपये की ठगी, फिर मांगे 17 लाख और

सत्यापन के नाम पर आरोपितों ने पीड़ित से कैनाल रोड स्थित एसबीआई खाते से चार लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। इतना ही नहीं, अगले दिन जांच पूरी कराने के बहाने 17 लाख रुपये और जमा करने का दबाव बनाया गया।

शक होने पर पीड़ित ने की शिकायत

जब कारोबारी को ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और बादशाहीनाका पुलिस से भी संपर्क किया।

पुलिस की कार्रवाई

बादशाहीनाका थाना प्रभारी राहुल कटियार ने बताया कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर साइबर ठगी का मामला दर्ज कर लिया गया है। साइबर टीम की मदद से आरोपितों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें: जरूरी सावधानियां

याद रखें: भारतीय कानून में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई चीज़ नहीं होती। कोई भी पुलिस, सीबीआई, या सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तार नहीं कर सकती। कोई भी असली अधिकारी पैसे ट्रांसफर करने की मांग कभी नहीं करता।

अगर ऐसी कॉल आए तो क्या करें:

घबराएं नहीं – ठग जानबूझकर डर और जल्दबाजी का माहौल बनाते हैं ताकि आप सोच-समझकर फैसला न ले सकें

कॉल तुरंत काट दें – किसी भी हाल में अपनी निजी जानकारी (आधार, बैंक डिटेल्स, OTP) शेयर न करें

वीडियो कॉल पर भरोसा न करें – वर्दी पहने अधिकारी या पुलिस स्टेशन जैसा सेटअप दिखाना भी नकली हो सकता है

स्थानीय पुलिस स्टेशन से खुद वेरिफाई करें – अगर सच में कोई मामला है, तो नजदीकी थाने जाकर या सरकारी वेबसाइट से जांच करें

अगर ठगी हो जाए तो तुरंत करें:

साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें

cybercrime.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें

अपने बैंक को तुरंत सूचित करें ताकि खाता फ्रीज़ कराया जा सके

जल्दी रिपोर्ट करने से पैसा वापस मिलने के चांस बढ़ जाते हैं — जितनी जल्दी शिकायत होगी, उतनी जल्दी बैंक ट्रांजैक्शन फ्रीज़ हो सकता है।